Bhajan Rajasthani Ganpati Vandana

 Bhajan :-गजानंद गणपति ने सिवरू*श्लोक – सुंडाला दुःख भंजना,

सदा जो वालक वेश,

सारों पहले सुमरिये,

गवरी नन्द गणेश।

*गजानंद गणपति ने सिवरू,

सरस्वती ने करू प्रणाम,

जय हो सूरा सतीया री,

अरे गजानन्द गणपति ने सिवरू,

सरस्वती ने करू प्रणाम,

जय हो सूरा सतीया री।।

*ए सार्दुलसिंहजी रोवाडा जनमीया,

सत्य कथा गुण गान करू,

जय हो सूरा सतीया री,

अरे सार्दुलसिंहजी रोवाडा जनमीया,

सत्य कथा गुण गान करू,

जय हो सूरा सतीया री।।

*ए माता पिता घणो लाड लडायो,

अरे माता पिता घणो लाड लडायो,

वीर रसपान कियो,

जय हो सूरा सतीया री।।

*ए बडा होया जद योद्धा बनीया,

मातृभूमि रो कारज सरीयो,

जय हो सूरा सतीया री,

अरे बडा होया जद योद्धा बनीया,

मातृभूमि रो कारज सरीयो,

जय हो सूरा सतीया री।।

*ए बडा बडा भोपत भालता रेगीया,

ए बडा बडा भोपत रिया भालता,

भीड़ पडी जद जाय मिलीया,

जय हो सूरा सतीया री,

अरे बडा बडा भोपत भालता रेगीया,

भीड़ पडी जद जाय मिलीया,

जय हो सूरा सतीया री।।

*ए अंग्रजो री कुबत कमाई,

ए सार्दुलसिंहजी सु जाय लडीया,

जय हो सूरा सतीया री,

अरे अंग्रेजो री कुबत कमाई,

ए सार्दुलसिंहजी सु जाय लडीया,

जय हो सूरा सतीया री।।

*गजानंद गणपति ने सिवरू,

सरस्ती ने करू प्रणाम,

जय हो सूरा सतीया री,

अरे गजानन्द गणपति ने सिवरू,

सरस्वती ने करू प्रणाम,

जय हो सूरा सतीया री।।

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